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काफ़िर और मुशरिक को हमेशा जहन्नम में रखना ज़ुल्म है सज़ा जुर्म के मुताबिक़ होनी चाहिये न कि हमेशा ये बोलना कैसा है*00001

🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🌹ﺃﻋﻮﺫ ﺑﺎﻟﻠﻪ ﻣﻦ ﺍﻟﺸﻴﻄﺎﻥ ﺍﻟﺮﺟﻴﻢ 🌹ﺑِﺴْــــــــــــــــﻢِﷲِﺍﻟﺮَّﺣْﻤَﻦِﺍلرَّﺣِﻴﻢ* *🌹السلام علیکم ورحمۃ اللہ وبر ر کا تہ* *🌹الصــلوة والسلام عليك يارسول الله ﷺ* *🧮 पोस्ट 038▪️* *📝 सवाल-;* *📇     काफ़िर और मुशरिक को हमेशा जहन्नम में रखना ज़ुल्म है सज़ा जुर्म के मुताबिक़ होनी चाहिये न कि हमेशा ये बोलना कैसा है* *✍️ जवाब-;* *📇   क़ानून से ज़्यादा सज़ा देना वाक़ई ज़ुल्म है और क़ानूनी सज़ाएं इंसाफ़ रब का क़ानून यह है कि हुकूमते इलाहिया के बागी यानी काफ़िर व मुशरिक की सज़ा हमेशा जहन्नम है लिहाज़ा यह हमेशगी ज़ुल्म नहीं चोर आधे घंटे में चोरी करता है और दो चार दिन में चोरी का माल खा पी लेता है मगर इसको सात या दस साल की जेल होती है, डाकू को उम्र क़ैद होती है वहां कोई नहीं कहता कि उसने एक घंटे में ज़ुर्म किया उसको एक ही घंटे जेल में रखो बल्कि क़ानून ने चूंकि उसकी सज़ा यही रखी है लिहाज़ा यह  ऐन (असल) इंसाफ है, ज़ुल्म नहीं है हां जो हाकिम क़ानून से ज़्यादा सज़ा दे वह ज़ुल्म है दूसरे यह कि काफ़िर ने अल्लाह की बे इंतेहा ने'मतें खाकर बे इंतेहा बग़ावत व नाफ़रमानी की इ...