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मुसलमान होकर होली मनाते हो
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🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 मुसलमान होकर होली मनाते हो 🥀* 👇👇👇👇👇 *हदीस* _*हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि *مَنْ تَشَبَّہَ بِقَوْمٍ فَہُوَ مِنْہُمْ* *जो जिस क़ौम से मुशाबहत रखेगा उसका हश्र उसी के साथ होगा।*_ 📚 *अबु दाऊद,हदीस 4033* _*मगर आज के मुसलमान का तो हाल ही बुरा है वो तो कुफ्र भी माज़ अल्लाह ऐसे करता है जैसे कोई बात ही ना हो,कोई होली खेल रहा है तो कोई दीवाली मना रहा है कोई तो सीधा मुशरिकों की सूरतो हैबत बनाकर घूम रहा है फिर उस पर तुर्रा ये कि वो अब भी सच्चे पक्के मुस्लमान हैं,अभी पिछले साल अखबार में आया कि देवा शरीफ में वारिस पाक के अहाते में होली खेली गयी माज़ अल्लाह बल्कि तस्वीर तक आयी है कोई इससे इंकार नहीं कर सकता,जब नाम निहाद दीनदारों का ये हाल है तो अवाम तो वैसे ही जाहिल है उसे तो बस बहाना चाहिए और वो बहाना कुछ जाहिल मुल्ला अक्सर अवाम को फराहम कराते रहते हैं,अरे भाई इतनी सी बात समझ में नहीं आती कि जिसका जो त्यौहार है उसको मनाने दीजिये क्या आपके मज़हब में होली खेलना लिखा है अगर नहीं तो क्यों आप अपना ईमान खराब कर रहे हैं लेकिन अगर ईमान की इतनी ही फिकर ह...
मुसलमान और होली
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मुसलमान और होली* *हदीस* - हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि *مَنْ تَشَبَّہَ بِقَوْمٍ فَہُوَ مِنْہُمْ* जो जिस क़ौम से मुशाबहत रखेगा उसका हश्र उसी के साथ होगा 📕 अबु दाऊद,हदीस 4033 📕 मिश्कात,सफह 375 📕 फैज़ुल क़दीर,जिल्द 6,सफह 104 *ⓩ मुशाबेहत 2 तरह की होती है एक मज़हबी मुशाबेहत जैसे ज़न्नार या जिनीव बांधना माथे पर तिलक लगाना काफिरो के मज़हबी त्यौहार मनाना या उनके कुफ्रिया कामों में शामिल होना या उसकी मुबारक बाद देना अगर माज़ अल्लाह कोई मुसलमान इन कामों में मुलव्विस है तब तो वो खुद काफिर है,और दूसरी है क़ौमी मुशाबेहत ये उनका मज़हबी शियार तो नहीं मगर इससे भी परहेज़ चाहिए जैसे उनकी मुशाबेहत में उन जैसी वज़अ क़तअ बनाना कभी ये हराम होती है तो बाज़ मर्तबा ऐसी वज़अ क़तअ बनाना कुफ्र जैसे कि टाई बांधना क्योंकि ये ईसाईओं का मज़हबी निशान है कि उनके नज़दीक हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम को सूली दे दी गयी माज़ अल्लाह जिसकी याद में वो सूली यानि क्रॉस का निशान अपने गले में टांगे फिरते हैं जब कि ये अक़ीदा महज़ बातिल है क्योंकि वो ज़िंदा आसमान पर मौजूद हैं और ये क़ुर्आन से साबित है लिहाज़ा मुसलमान ...
Holi Khelna Kaisa Or Usme Rang Lagana Ya Lagwana Kaisa Or Jo Kafiro Se Ittehad Ki Bina Par Usme Shareek Ho Ya Use Achcha Samajh Kar Un Par Kya Hukm He
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🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴🏁🔴 *🥀 Holi Khelna Kaisa Or Usme Rang Lagana Ya Lagwana Kaisa Or Jo Kafiro Se Ittehad Ki Bina Par Usme Shareek Ho Ya Use Achcha Samajh Kar Un Par Kya Hukm He 🥀* Holi Ke Din Holi Khelna Or Usme Rang Lagana Ya Lagwana Agar Use Achcha Samajh Kar He To Kufr He Warna Sakht Najaizo Haram He, Ki Ye Hinduo Ka Shuaare Mazhab He. Huzur SadrushShariyah Alaihir Rahmato Ridwan Farmate He, Holi Hinduo Ki Aatish Parasti Ka Ek Khas Din He Jis Me Aag Ki Parastish Karte Or Apne Taur Par Khushi Manate He. Holi Khelna Ya Us Zamana Me Badan Ya Kapde Par Rang Dalna Ya Dalwana Khas Shuaare Hunood He, Or Ayse Umoor Ka Irtekab Kufr He, Hadees Shareef Me He, من تشبہ بقوم فہو منہم Us Shakhs Par Taubah Farz He Or Tajdide Nikah Lazim He. *📚(Fatawa Amjadiya, J-4 S-151)* Or Sarkar Aala Hazrat Alaihir Rahmato Ridwan Farmate He, Zahir He Ki Af'aale Shaneeaa Mazkoora Sakht Mal'aoon He Jis Ne Unhe Mustahsan Jana Ba Ittifaqe A'imma e Kiram Kafir He, Gamzul Auyoon Wal Basaair Me He, من اس...