धनतेरस और मुसलमान
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*🥀धनतेरस और मुसलमान 🥀*
✏️ आज मुशरिकीने हिन्द का त्यौहार 'धनतेरस' है जिसे उ़लमा की ज़ुबान में 'धनत्रयोदशी' भी कहा जाता है जबकि जैन धर्म की किताबों में इसे 'ध्यान तेरस' और 'धन्य तेरस' नाम से भी याद किया गया है
ये त्यौहार हिन्दू कैलेंडर 'विक्रम संवत्' के मुत़ाबिक़ 'कार्तिक' महीने की 'कृष्ण पक्ष (अय्यामे सूद)' की 'त्रयोदशी (तेरह तारीख़)' के दिन मनाया जाता है इस दिन के बारे में कुफ़्फ़ार का कुफ़्रिया अ़क़ीदा ये है कि
इस दिन कोई चीज़ ख़रीदने से उसमें 13 गुना बरकत होती है इसीलिए आज के दिन कुफ़्फ़ार की भीड़ बाज़ार में कुछ न कुछ ख़रीदने के लिए जुटी रहती है आप अपने अपने शहर में इसका तजरिबा कर सकते हैं
कोई चांदी ख़रीदता है तो कोई उसके बर्तन कोई धनिया के बीज ख़रीदकर घर में रख लेता है फिर दीपावली के बाद उसे खेत में बो देता है कोई इसी दिन मअ़बूदाने बात़िलह 'लक्ष्मी' और 'गणेश' की मूर्तियां ख़रीदता है ताकि दीपावली की रात इनकी पूजा कर सके जबकि कुछ लोग पीतल के बर्तन ख़रीदने को तरजीह़ देते हैं और अगर कुछ न हो सके तो झाड़ू ही ख़रीद लाते हैं अफ़सोस
कि बहुत से नादान मुसलमान
ख़ुस़ूस़न् देहाती मुसलमान
भी कुफ़्फ़ार के कुफ़्रिया अ़क़ीदे की बिना पर होने वाली इस ग़लीज़ रस्म को बड़ी तादाद में फॉलो कर रहे हैं
*إنا لله وإنا إليه رجعون*
ये त्यौहार 'क़ौमी' नहीं बल्कि 'मज़हबी' है इसलिए मैंने इसे कुफ़्र कहा इसकी बुनियाद क्या है इसपर मैं बहुत तफ़्सीली और मुदल्लल गुफ़्तगू करूंगा
इस त्यौहार की निस्बत जिस से है उसका नाम है 'धन्वन्तरि', जिसे कुफ़्फ़ार के दरमियान विष्णु का अवतार माना जाता है इसकी हैअते कज़ाइय्यह ये है कि इसकी चार भुजायें (arms) हैं ऊपर की दोनों भुजाओं में 'शंख' और 'चक्र' हैं जबकि नीचे वाली भुजाओं में से एक में 'जलूका' व 'औषध', तथा दूसरे में 'अमृत कलश' लिये हुये है इसकी सबसे प्यारी धातु पीतल है इसीलिये धनतेरस को पीतल के बर्तन ख़रीदने को तरजीह़ दी जाती है
कहीं कहीं इससे मुख़्तलिफ़ शक्ल में भी इसके बुत पाए जाते हैं
इसे 'आयुर्वेद का देवता' माना जाता है इसी वजह से इसे 'सेहत का भगवान' भी कहा जाता है
आज 'धनतेरस' के दिन कुफ़्फ़ार के ज़रिए इसी बुत की पूजा की जाती है जिससे सेहत और रिज़्क़ वग़ैरह में बरकत की प्रार्थना की जाती है
*अस्तग़्फ़िरुल्लाह!*
इसी दिन इसकी पैदाइश हुई इसी देवता की पैदाइश के दिन को 'धनतेरस' के रूप में मनाया जाता है इसकी पैदाइश कैसे हुई इसका मज़ेदार किस्सा सुनिए
पौराणिक तारीख़ में एक बहुत अहम स्टोरी है जिसे 'समुद्र मन्थन' के नाम से याद किया जाता है ये स्टोरी भागवत पुराण, महाभारत, और विष्णु पुराण में बहुत तफ़्सील से आई है
मुख़्तस़र ये कि
जब राक्षसों की ताक़त व इक़्तिदार बढ़ने लगे और देवताओं की तरक्की कम हो गयी तो सारे देवता ब्रह्मा को लेकर विष्णु के पास अपनी परेशानी लेकर पहुंचे तो विष्णु ने उन देवताओं को मशविरा दिया कि 'क्षीर सागर' (सात समुद्रों में से एक है जो दूध से भरा है जिसपर साँपों के तख़्त पर विष्णु का दरबार लगता है) से अमृत निकालकर पियें विष्णु ने आगे कहा कि इस अमृत को पीने से देवता अमर हो जाएंगे तो राक्षस कभी भी उनका ख़ातिमा नहीं कर पाएंगे मगर इस अमृत को अकेले निकाल पाना देवताओं के बस की बात नहीं है इसलिए राक्षसों के साथ किसी भी शर्त पर सुलह करके अमृत निकालें फिर सुलह हुई और 'समुद्र मंथन' शुरू हुआ
आपको पहले ये समझा देता हूं कि 'समुद्र मंथन' है क्या और उसके अहम किरदार कौन कौन थे
'समुद्र मंथन' का मतलब ये है कि समुद्र को इस तरह पेरना, फिराना, जैसे रई के ज़रिये मठ्ठा पेरकर नैनी फिर नैनी से घी बनाया जाता है ऐसे ही समुद्र को पेरा गया था
😂😆😁
👉कुफ़्फ़ार के मुत़ाबिक़ जिस जगह ये वाक़िया पेश आया था वो जगह 'मन्दराचल पहाड़ (मन्दार पर्वत)' था जो आज के बिहार के बांका ज़िला में मौजूद है जो भागलपुर शहर के दक्षिण में लगभग 45 किमी की दूरी पर है
रई का काम इसी पहाड़ से लिया गया और इसपर रस्सी की तरह 'वासुकी' साँप को लपेटा गया (जो ऋषि कश्यप का बेटा और एक हज़ार मशहूर साँपों में से सबसे बड़े 'शेषनाग' के बाद दूसरे नंबर पर आता है) जिसे एक तरफ़ देवताओं ने पकड़ा और दूसरी तरफ़ राक्षसों ने
इसकी कैफ़ियत वही होगी जैसा कमेंट बॉक्स में एक इमेज में दिया गया है
*इस समुद्र मंथन से एक एक करके 14 रत्न निकले*
कालकूट (या हलाहल ज़हर), ऐरावत हाथी, कामधेनु गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, कौस्तुभ मणि, कल्प वृक्ष, रम्भा नाम की अप्सरा (🙈), लक्ष्मी देवी, वारुणी शराब, चन्द्रमा, शारंग धनुष, शंख, गंधर्व, अमृत लेकर धन्वंतरी
तो इस तरह समुद्र को पेरा गया तो 14वें नंबर पर धन्वंतरी की पैदाइश हुई
इसी मअ़बूदे बात़िल की निस्बत से आज का ये त्यौहार मनाया जाता है जो कि ख़ालिस़ कुफ़्र है
कोई घड़े, से पैदा हो गया कोई नाभि से, कोई जांघ से, कोई कमल से, कोई मछली से, कोई समंदर से,
वो सब कुछ तो ठीक है
*मगर सय्यिदुना ई़सा (अ़लैहिस्सलाम) की बिना बाप के पैदाइश मानने में इन्हीं कुफ़्फ़ार को मौत आ रही है*
जिसे ये पूरी स्टोरी देखना हो वो
*📚'विष्णु पुराण' अंश नं. 1, अध्याय नं. 9 को पढ़ सकता है*
धंवन्तरि की पैदाइश पर इसी के एक श्लोक में देखिए:
*📚 विष्णु पुराण, अंश नं. 1, अध्याय नं. 9, श्लोक नं. 18*
✍️ अब शरीअ़त का हुक्म सुन लो
काफ़िरों के वो त्यौहार जिनका तअ़ल्लुक़ डायरेक्ट इनके किसी देवता से हो जैसे धनतेरस, दीपावली, होली, जन्माष्टमी, राम नवमी, गणेश चतुर्थी, नवदुर्गा, शिवरात्रि वग़ैरह;
इनकी मुबारकबाद देना कुफ़्र है
यानी जिस मुसलमान ने भी मुबारकबाद दी तो वो काफ़िर हो जाएगा जब मुबारकबाद देने का इतना बड़ा गुनाह है तो सोचिए इन्हें अच्छा समझना और मनाना इनकी रस्में करना कितना बड़ा जुर्म होगा
*لا حول ولا قوة الا بالله العلي العظيم*
मुसलमानों!
अल्लाह का ख़ौफ़ करो
अगर कोई मुसलमान कुफ़्र का काम कर देता है तो इसका मतलब होता है कि ये चार काम ख़त्म हो गए
1. उसका ईमान ख़त्म हो गया
2.उसका निकाह टूट गया (अगर वो शादीशुदा हो तो)
3. उसकी बैअ़त टूट गयी (अगर किसी से मुरीद है तो)
4. अगर उसने ह़ज्जे फ़र्ज़ कर लिया था तो वो भी ख़त्म
*👇पत्थर के पुजारी👇*
*📚क़ुरआन 37:95*
"اَتَعْبُدُوْنَ مَا تَنْحِتُوْنَۙ"،
(ऐ काफ़िरो!)
क्या तुम उन (पत्थर के बुतों) को पूजते हो जिन्हें ख़ुद (अपने हाथों) से तराश (कर बना) ते हो
*📚क़ुरआन 39:67*
"وَمَا قَدَرُوا اللّٰهَ حَقَّ قَدْرِهٖ وَالْاَرْضُ جَمِیْعًا قَبْضَتُهٗ یَوْمَ الْقِیٰمَةِ وَالسَّمٰوٰتُ مَطْوِیّٰتٌۢ بِیَمِیْنِهٖؕ سُبْحٰنَهٗ وَ تَعٰلٰى عَمَّا یُشْرِكُوْنَ"،
और उन्होंने अल्लाह की क़द्र न की जैसा कि उसका ह़क़ था और वो क़ियामत के दिन सब ज़मीनों को समेट देगा और उसकी क़ुदरत से सब आसमान लपेट दिए जाएंगे और (अल्लाह) उनके शिर्क से पाक और बरतर है
*📚 कंज़ुल् ईमान*
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*🏁 मसलके आला हज़रत 🔴*
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